रूपहली अमूर्त ज़मीन पर दर्शक की ओर बढ़ते, सुर्ख़ कलगी वाले काले मुर्गे का अभिव्यंजक तैलचित्र

क्र. 4

मुर्गा

परेड पर निकला बाड़े का सेनापति

माध्यम
कैनवास पर तैलचित्र
आयाम
45 × 60 cm
वर्ष
2025

वह सीधा दर्शक की ओर बढ़ता है, नाटकीय आत्मविश्वास के साथ कैनवास की पूरी ऊँचाई पर अपना दावा ठोकता हुआ; एक पतली टाँग पर क़दम के बीच थमा, दूसरा पंजा उठा और भिंचा हुआ। चित्र में किसी राजकीय व्यक्तिचित्र की अकड़ है और घात की प्रतीक्षा का तनाव भी।

उसका शरीर लगभग काले पंखों का तूफ़ान है: लंबे, अधीर स्पर्शों में खिंचे कोयला, अम्बर और स्लेटी रंग, जिनमें गहरे लाल और ज़ंग की कौंधें यों दौड़ती हैं मानो पंखों के नीचे अंगारे दहक रहे हों। गर्दन के चारों ओर रूपहली ग्रीवा-पंखियाँ सूखे, पंखदार झटकों में झरती हैं, जो लगभग गति की धुंध सी पढ़ी जाती हैं। और फिर सिर, इस कृति का रंग-विस्फोट: गाढ़े, गीले इम्पास्टो में रची सुर्ख़ कलगी और लटकती लोलकियाँ, जिनके बीच एक छोटी, तीखी, बुद्धिमान आँख जड़ी है।

उसके नीचे की ज़मीन एक कौशलपूर्ण अमूर्त अंश है: रूपहले-धूसर और अस्थि-रंग के तिरछे रगड़े हुए लेप, जिन पर बिखरे भूसे जैसी ज़ंग-लाल लकीरें खिंची हैं; फ़र्श दर्शक की ओर झुक आता है और पक्षी को चौखट से बाहर आगे धकेल देता है। हाशियों में छिपे टील स्पर्श किनारों को ठंडक देते हैं और लगभग एकवर्णी देह को जीवित रखते हैं।

अक्खड़ और हल्का सा हास्यप्रद, परेड पर निकला बाड़े का सेनापति, फिर भी अभिव्यंजनावादी व्यक्तिचित्र की गंभीरता से चित्रित।

तूलिका का काम

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मुर्गे के सिर का समीप दृश्य: गाढ़े सुर्ख़ इम्पास्टो में कलगी और लोलकियाँ, सतर्क काली आँख, पीली तराशी हुई चोंच
सुर्ख़ विस्फोट
धुंधले धूसर मैदान पर मुर्गे की रूपहली-श्वेत ग्रीवा-पंखियाँ और गहरे टील रंग की पूँछ के स्पर्श
गति की धुंध सी ग्रीवा-पंखियाँ
रगड़े हुए धूसर और गेरुए फ़र्श पर मुर्गे के लाल शल्कों वाले पंजे और नाख़ूनों का तूलिका-विवरण
क़दम के बीच
धूसर, गेरुए और ज़ंग रंग की परतों वाला अमूर्त पृष्ठभूमि अंश, नीचे दाहिनी ओर कलाकार के हस्ताक्षर
अमूर्त ज़मीन, हस्ताक्षर सहित

किसी कक्ष में

पलस्तर की दीवार पर मुर्गे का चित्र, नीचे टील गद्दियों वाला मलाई रंग का बूक्ले सोफ़ा